
प्रत्येक माह दूसरी तारीख तक अनिवार्य रूप से वेतन/मानदेय/पारिश्रमिक भुगतान किया जाए।
समय पर नियमित प्रोन्नति/एम०ए०सी०पी का लाभ दिया जाए।
सभी संवर्गों का प्रत्येक वर्ष माह जनवरी में वरीयता सूची का प्रकाशन सुनिश्चित कराया जाए।
वेतन/मानदेय/पारिश्रमिक भुगतान हेतु सम्पूर्ण वर्ष के लिए आवंटन एक ही बार अप्रैल माह में जारी किया जाए।
कार्यालय अवधि से अधिक देर तक कार्य लिए जाने पर ओवरटाइम भत्ता दिया जाए।
संविदा/आउटसोर्सिंग/दैनिक वेतनभोगी कर्मियों की सेवा 60 वर्षों तक के लिए सुरक्षित करते हुए उन्हें नियमित पदों के विरुद्ध समायोजित किया जाए।
समान काम के बदले समान वेतन दिया जाए।
पी०एफ०आर०डी०ए० एक्ट को रद्द किया जाए।
सरकारी संस्थानों/लोक उपक्रमों के निजीकरण पर रोक लगाई जाए।
नए श्रम संहिता को रद्द कर पुराने लेबर ऐक्ट को बहाल किया जाए।
सरकारी संस्थानों में संविदा/आउटसोर्सिंग/ठेका आदि पर बहाली करना बंद की जाए एवं रिक्त पदों के विरुद्ध नियमित नियुक्ति की जाए।
सभी सरकारी कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण सूचना
विषय: 12 दिसंबर 2026 को रामलीला मैदान, नई दिल्ली में AISGEF द्वारा आयोजित राष्ट्रीय कर्मचारी महारैली
प्रिय साथियों,
जैसा कि आप जानते हैं, अखिल भारतीय राज्य सरकारी कर्मचारी महासंघ (AISGEF) की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक, जो दिनांक 12-13 सितंबर 2026 को श्रीनगर में राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री सुभाष लांबा जी की अध्यक्षता में हुई, में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया है कि सरकारी कर्मचारियों की लंबित मांगों के समर्थन में दिनांक 12 दिसंबर 2026 को रामलीला मैदान, नई दिल्ली में राष्ट्रीय महारैली का आयोजन किया जाएगा।
रैली की मुख्य मांगें: * सभी संविदा कर्मचारियों का समयबद्ध नियमितीकरण * आउटसोर्सिंग प्रथा की समाप्ति रिक्त पदों पर स्थायी नियुक्ति *समान काम के लिए समान वेतन
गोड्डा जिला के सभी विभागों के कर्मचारियों से आग्रह है कि इस ऐतिहासिक रैली में अधिक से अधिक संख्या में भाग लेकर इसे सफल बनाएं। यह हमारी एकता और अधिकारों की लड़ाई है।
निवेदक: मोजाहिदुल इस्लाम, जिला मंत्री, झारखण्ड राज्य अराजपत्रित कर्मचारी महासंघजिला इकाई – गोड्डा, झारखंड











दिनांक 30 अगस्त 2026 को झारखण्ड राज्य अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ, जिला इकाई गोड्डा का पाँचवाँ जिला सम्मेलन आयोजित हुआ, जिसमें नए सत्र के लिए नई कार्यकारिणी का गठन हुआ ।
ABOUT JSNGEF
झारखण्ड राज्य अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ एक ऐसा संगठन है जो राज्य के अराजपत्रित सरकारी कर्मचारियों के हितों की रक्षा, उनके अधिकारों के संरक्षण तथा उनके सर्वांगीण विकास के उद्देश्य से कार्य करता है। महासंघ विशेष रूप से उन कर्मचारियों की आवाज़ बनने के लिए प्रतिबद्ध है जो विभिन्न कारणों से अपने वैध अधिकारों और समस्याओं को उचित मंचों पर प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने में स्वयं को असमर्थ पाते हैं। महासंघ का मूल उद्देश्य केवल कर्मचारियों की समस्याओं को उठाना ही नहीं, बल्कि संविधान द्वारा प्रदत्त अधिकारों, सामाजिक न्याय, नैतिक मूल्यों एवं लोकतांत्रिक सिद्धांतों के अनुरूप उनके अधिकारों की प्राप्ति हेतु सामूहिक एवं शांतिपूर्ण प्रयास करना है। कर्मचारी हितों की रक्षा, सम्मानजनक कार्य-परिस्थितियों की स्थापना तथा न्यायपूर्ण प्रशासनिक व्यवस्था के लिए सतत संघर्ष करना महासंघ की प्राथमिक जिम्मेदारी है। महासंघ यह मानता है कि यदि सरकार की कोई नीति, निर्णय या व्यवस्था कर्मचारी एवं श्रमिक हितों के प्रतिकूल, अन्यायपूर्ण अथवा दमनकारी हो, तो उसके विरुद्ध लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक तरीकों से संगठित होकर आवाज़ उठाना प्रत्येक कर्मचारी संगठन का नैतिक दायित्व है। साथ ही कर्मचारियों के संवैधानिक एवं विधिक अधिकारों की रक्षा के लिए आवश्यक हर संभव प्रयास करना महासंघ की प्रतिबद्धता है। इसके अतिरिक्त महासंघ कर्मचारियों के आर्थिक, सामाजिक एवं मानसिक कल्याण को समान रूप से महत्व देता है। आवश्यकता पड़ने पर कर्मचारियों को हरसंभव नैतिक, मानसिक एवं आर्थिक सहयोग प्रदान करना तथा उनके व्यावसायिक विकास के लिए आवश्यक प्रशिक्षण, मार्गदर्शन और क्षमता-विकास कार्यक्रम आयोजित करना महासंघ के प्रमुख उद्देश्यों में शामिल है, जिससे वे अपने दायित्वों का अधिक दक्षता, पारदर्शिता और उत्तरदायित्व के साथ निर्वहन कर सकें। वर्तमान समय में सरकारी कर्मचारी बढ़ते कार्यभार, प्रशासनिक दबाव तथा पारिवारिक एवं सामाजिक जिम्मेदारियों के कारण मानसिक तनाव (Stress) का सामना कर रहे हैं, जिसका प्रतिकूल प्रभाव उनके स्वास्थ्य, कार्यक्षमता तथा पारिवारिक जीवन पर पड़ रहा है। इस गंभीर स्थिति को ध्यान में रखते हुए महासंघ कर्मचारियों के तनाव प्रबंधन (Stress Management), मानसिक स्वास्थ्य संवर्धन, परामर्श, प्रेरणा तथा आवश्यक लॉजिस्टिक एवं सहयोगात्मक सहायता (Logistic Support) उपलब्ध कराने को भी अपनी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मानता है, ताकि कर्मचारी स्वस्थ, संतुलित एवं सकारात्मक कार्य वातावरण में अपनी सेवाएँ प्रदान कर सकें।महासंघ का दृढ़ विश्वास है कि “यदि लक्ष्य सामूहिक है, तो प्रयास भी सामूहिक होना चाहिए।” इसी भावना के साथ संगठन जाति, धर्म, भाषा, लिंग अथवा किसी भी प्रकार के भेदभाव से ऊपर उठकर राज्य के सभी अराजपत्रित सरकारी कर्मचारियों के हित, सम्मान, अधिकार और कल्याण के लिए समर्पित भाव से कार्य करता रहेगा।
झारखण्ड राज्य अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ का उद्देश्य शोषित, पीड़ित, उपेक्षित एवं वंचित कर्मचारियों के साथ सशक्त रूप से खड़ा होना तथा उन्हें हरसंभव नैतिक, सामाजिक, मानसिक एवं आवश्यक सहयोग प्रदान करना है, ताकि वे अपने शासकीय दायित्वों के साथ-साथ पारिवारिक उत्तरदायित्वों का भी गरिमा और आत्मविश्वास के साथ निर्वहन कर सकें। महासंघ कर्मचारियों को उनके संवैधानिक एवं वैधानिक अधिकारों के प्रति जागरूक करने, उनमें आत्मविश्वास का संचार करने तथा उनके सशक्तिकरण के लिए निरंतर प्रयासरत रहने के लिए प्रतिबद्ध है। हम सभी सबसे पहले कर्मचारी हैं—एक परिवार के सदस्य, एक-दूसरे के भाई-बहन। इसलिए हमारा सामूहिक दायित्व है कि हम संगठित रहें, एक-दूसरे का सहयोग करें, अपने अधिकारों की रक्षा करें तथा कर्मचारियों पर होने वाले किसी भी प्रकार के अन्याय, शोषण, उत्पीड़न और भेदभाव के विरुद्ध लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक तरीकों से एकजुट होकर संघर्ष करें। महासंघ का विश्वास है कि “यदि लक्ष्य सामूहिक है, तो प्रयास भी सामूहिक होना चाहिए।” एक संगठित, जागरूक और उत्तरदायी कर्मचारी वर्ग ही एक विकसित, समृद्ध और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। यह तभी संभव है जब प्रत्येक कर्मचारी ईमानदारी, निष्ठा, पारदर्शिता और समर्पण के साथ अपने कर्तव्यों का निर्वहन करे तथा जाति, धर्म, लिंग, भाषा, क्षेत्र और अन्य सभी प्रकार के भेदभाव से ऊपर उठकर मानवता एवं समानता के मूल्यों को अपनाए। महासंघ का संकल्प है कि वह प्रत्येक शोषित, पीड़ित, उपेक्षित एवं वंचित कर्मचारी की आवाज़ बने, उनके सम्मान, अधिकार और गरिमा की रक्षा के लिए निरंतर कार्य करे तथा समाज में आपसी भाईचारे, सौहार्द, समानता और सामाजिक न्याय की भावना को सुदृढ़ बनाए। हमारा विश्वास है कि शांति, एकता और सामाजिक समरसता ही स्थायी विकास की आधारशिला हैं। आइए, हम केवल अपने हितों तक सीमित न रहें, बल्कि अपने सहकर्मियों और समाज के प्रत्येक व्यक्ति के सुख, सुरक्षा और सम्मान की भी चिंता करें। सामूहिक सहयोग, परस्पर विश्वास और साझा उत्तरदायित्व की भावना के साथ हम एक ऐसे न्यायपूर्ण, समावेशी, संवेदनशील और प्रगतिशील समाज के निर्माण में अपना सक्रिय योगदान दें, जहाँ प्रत्येक कर्मचारी सम्मानपूर्वक जीवन जी सके और अपने अधिकारों का निर्भीक होकर उपयोग कर सके।
साथियो !
किसी भी सामूहिक लक्ष्य की प्राप्ति के लिए सामूहिक प्रयास अनिवार्य होते हैं। यदि लक्ष्य व्यक्तिगत हो, तो उसे व्यक्तिगत प्रयासों से प्राप्त किया जा सकता है; किन्तु यदि लक्ष्य समाज, संगठन अथवा कर्मचारियों के व्यापक हित से जुड़ा हो, तो उसके लिए सभी का संगठित होकर एकजुट प्रयास करना आवश्यक है। इसी सिद्धांत पर झारखण्ड राज्य अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ, गोड्डा कार्य करता है। हमारा उद्देश्य किसी एक व्यक्ति विशेष के हितों की रक्षा करना नहीं, बल्कि जिले के प्रत्येक अराजपत्रित कर्मचारी (संविदा/आउट्सोर्स/दैनिक कर्मी सहित) के अधिकार, सम्मान और कल्याण के लिए संघर्ष करना है। इसलिए हमारा प्रत्येक प्रयास, प्रत्येक आंदोलन और प्रत्येक संघर्ष सामूहिक भावना, एकता और साझा उत्तरदायित्व पर आधारित है। साथियो, आप सभी हमारे महासंघ के गौरवशाली इतिहास से भली-भाँति परिचित हैं। वर्ष 1967 में इस संगठन की स्थापना बिहार राज्य अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ के रूप में हुई थी। इस महासंघ ने दशकों तक कर्मचारियों के अधिकारों और सम्मान की रक्षा के लिए उल्लेखनीय संघर्ष किया। 15 नवम्बर 2000 को झारखण्ड राज्य के गठन के उपरांत संगठन का पुनर्गठन हुआ और उसी ऐतिहासिक प्रक्रिया के परिणामस्वरूप झारखण्ड राज्य अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ का गठन हुआ।हमारे लिए यह अत्यंत गर्व का विषय है कि गोड्डा जिले के सुपुत्र कॉमरेड उमेश प्रसाद मिश्रा को महासंघ का प्रथम राज्य महामंत्री बनने का गौरव प्राप्त हुआ। यह न केवल गोड्डा बल्कि पूरे झारखण्ड के कर्मचारी आंदोलन के इतिहास का एक स्वर्णिम अध्याय है। आरंभ से ही बिहार राज्य अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ ऑल इंडिया स्टेट गवर्नमेंट एम्प्लॉइज फेडरेशन (AISGEF) से संबद्ध रहा है। 23–24 जनवरी 1960 को हैदराबाद में AISGEF की स्थापना हुई थी तथा कॉमरेड ए. श्रीरामुलु इसके प्रथम महासचिव निर्वाचित हुए थे। झारखण्ड राज्य के गठन के बाद भी हमारा महासंघ उसी राष्ट्रीय परंपरा और विचारधारा से जुड़ा रहा तथा आज भी AISGEF से संबद्ध होकर कर्मचारियों के अधिकारों की लड़ाई लड़ रहा है। साथियो, 30 अगस्त 2026 को आदरणीय राज्य महामंत्री कॉमरेड वीरेंद्र कुमार यादव, राज्य अध्यक्ष कॉमरेड रवीन्द्रनाथ ठाकुर मुख्य संरक्षक कॉमरेड रामधार शर्मा की गरिमामय उपस्थिति में आप सभी ने मुझे सर्वसम्मति से महासंघ के जिला अध्यक्ष का दायित्व सौंपा। उस अवसर पर मैंने केवल एक बात कही थी— “मुझे एक बहुत बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई है, और मैं आप सभी के सहयोग से इस जिम्मेदारी का पूरी निष्ठा, ईमानदारी और समर्पण के साथ निर्वहन करने का प्रयास करूँगा।” आज भी वही संकल्प मेरी सबसे बड़ी प्रेरणा है। मेरा प्रथम कर्तव्य उन साथियों की सेवा करना है जो किसी न किसी रूप में पीड़ित, शोषित, उपेक्षित या अपने वैध अधिकारों से वंचित हैं। यदि किसी कर्मचारी को समय पर वेतन नहीं मिलता, सेवा संबंधी समस्याओं का समाधान नहीं होता, या उसके साथ अन्याय होता है, तो उसकी आवाज़ बनना और उसके अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष करना ही महासंघ का वास्तविक धर्म है। साथियो, हर संगठन के सामने चुनौतियाँ आती हैं। परिवर्तन का विरोध केवल प्रशासनिक व्यवस्था ही नहीं करती, बल्कि कई बार अपने ही लोग भी अधिकारों की लड़ाई लड़ने वालों को हतोत्साहित करने का प्रयास करते हैं। फिर भी हमें निराश नहीं होना है, क्योंकि इतिहास गवाह है कि न्याय, सत्य और संगठन की शक्ति अंततः विजय प्राप्त करती है। दुर्भाग्य से हमारे जिले में आज भी अनेक ऐसे कर्मचारी हैं जिन्हें अपने वैध वेतन, सेवा-लाभ और अधिकार प्राप्त करने के लिए लंबा संघर्ष करना पड़ता है। यदि सरकारी व्यवस्था पूरी संवेदनशीलता, पारदर्शिता और उत्तरदायित्व के साथ कार्य करती, तो शायद हमारे जैसे कर्मचारी संगठन की आवश्यकता ही नहीं पड़ती। किंतु जब व्यवस्था अपने उद्देश्य से भटक जाती है, तब संगठन की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है। हमारा संघर्ष किसी व्यक्ति या संस्था के विरुद्ध नहीं, बल्कि ऐसी व्यवस्था के पक्ष में है जहाँ प्रत्येक कर्मचारी को उसका वैध वेतन, सम्मान और अधिकार समय पर प्राप्त हो।
साथियो ! आइए, हम सब मिलकर इस महासंघ को और अधिक मजबूत बनाएँ। अपने व्यक्तिगत मतभेदों से ऊपर उठकर कर्मचारियों की एकता को सशक्त करें। हमारे संघर्ष का उद्देश्य किसी से टकराव नहीं, बल्कि न्याय, समानता, सम्मान और कर्मचारी हितों की रक्षा है। याद रखिए—
“संगठन की सबसे बड़ी शक्ति उसकी एकता होती है, और एकजुट कर्मचारी कभी पराजित नहीं होते।”
आइए, हम संकल्प लें कि हम हर पीड़ित, शोषित और वंचित कर्मचारी के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े रहेंगे, उसके अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष करेंगे और एक ऐसे कार्य-संस्कृति के निर्माण में अपना योगदान देंगे जहाँ प्रत्येक कर्मचारी सम्मान, सुरक्षा और आत्मविश्वास के साथ अपनी सेवाएँ दे सके। एकता हमारी शक्ति है, संघर्ष हमारी पहचान है और न्याय हमारा लक्ष्य।
आप सभी का हार्दिक धन्यवाद।
साकेत कुमार, जिला अध्यक्ष, झारखण्ड राज्य अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ, गोड्डा
















