JHARKHAND STATE NON-GAZETTED EMPLOYEES' FEDERATION, GODDA

(Recognition No- 663/R.S. Dated- 07.04.1967)

डिजिटल युग में कार्यालय कार्य प्रणाली : चुनौतियाँ एवं आवश्यक सुधार

वर्तमान समय में कार्यालय कार्य प्रणाली में आमूल-चूल परिवर्तन देखने को मिल रहा है। यह परिवर्तन मुख्यतः प्रशासनिक कार्यों में सूचना प्रौद्योगिकी (Information Technology) के व्यापक उपयोग का परिणाम है। यद्यपि भारत में सूचना क्रांति का प्रारम्भ वर्ष 1990 के दशक में ही हो चुका था, किन्तु वर्ष 2006 में राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस योजना (National e-Governance Plan – NeGP) तथा वर्ष 2015 में डिजिटल इंडिया (Digital India) अभियान के प्रभावी क्रियान्वयन के पश्चात सरकारी कार्यालयों की कार्यशैली में अभूतपूर्व परिवर्तन आया है।

एक समय था जब कार्यालयों के अधिकांश कार्य पूर्णतः मैनुअल प्रणाली से संपादित होते थे, जबकि आज वही कार्य तीव्र गति से डिजिटल माध्यमों से किए जा रहे हैं। हालांकि कार्य प्रणाली में यह परिवर्तन अत्यंत तेज़ी से हुआ है, लेकिन इसके अनुरूप सेवा नियमों, कार्यालय प्रक्रियाओं तथा कार्य-संस्कृति में अपेक्षित संशोधन उसी गति से नहीं हो पाया है। परिणामस्वरूप कार्यालयों में कार्यरत लिपिकीय कर्मचारियों को नई कार्य प्रणाली के साथ सामंजस्य स्थापित करने में अनेक व्यावहारिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

वर्तमान में अधिकांश सरकारी कार्य ऑनलाइन माध्यम से संपन्न किए जा रहे हैं। इसके लिए विभिन्न कार्यालयों में अलग से कंप्यूटर ऑपरेटर नियुक्त किए जा रहे हैं, जो तकनीकी कार्यों का संचालन तो कुशलतापूर्वक कर लेते हैं, किन्तु प्रायः उन्हें प्रशासनिक नियमों, अधिनियमों, कार्यालय प्रक्रियाओं तथा पत्राचार संबंधी प्रावधानों की पर्याप्त जानकारी नहीं होती। दूसरी ओर, अनुभवी लिपिकों को कार्यालयीन नियमों, अधिनियमों और प्रक्रियाओं का गहन ज्ञान तो होता है, परंतु अनेक मामलों में वे आधुनिक डिजिटल उपकरणों एवं ऑनलाइन प्रणालियों के संचालन में अपेक्षित दक्षता नहीं रखते। ऐसी स्थिति में कार्यालय कार्यों के प्रभावी एवं त्रुटिरहित निष्पादन के लिए दोनों की सहभागिता अनिवार्य हो जाती है।

दुर्भाग्यवश, बदलती कार्य प्रणाली के अनुरूप पर्याप्त प्रशिक्षण की व्यवस्था न होने के कारण न तो कंप्यूटर ऑपरेटर और न ही लिपिक समान दक्षता एवं गति से कार्य कर पा रहे हैं। इसलिए बेहतर कार्य-संस्कृति, पारदर्शिता तथा प्रशासनिक दक्षता सुनिश्चित करने के लिए दोनों वर्गों के कर्मचारियों को नियमित एवं व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया जाना समय की सबसे महत्वपूर्ण आवश्यकता है।

एक अन्य महत्वपूर्ण समस्या यह है कि आज अधिकांश पत्राचार ई-मेल एवं अन्य डिजिटल माध्यमों से किया जा रहा है, जबकि प्राप्त एवं निर्गत पत्रों का अभिलेखीकरण और संधारण अभी भी अधिकांश कार्यालयों में पारंपरिक ऑफलाइन प्रणाली के माध्यम से किया जाता है। परिणामस्वरूप डिजिटल और पारंपरिक व्यवस्थाओं के बीच समुचित समन्वय का अभाव बना रहता है, जिससे पत्रों के संधारण, खोज, अनुश्रवण (Tracking) तथा अभिलेख प्रबंधन में अनावश्यक कठिनाइयाँ उत्पन्न होती हैं।

स्पष्ट है कि कार्यालय संचालन के वर्तमान स्वरूप और पुराने नियमों के बीच एक बड़ा अंतर उत्पन्न हो गया है। यदि समय रहते कार्यालयीन नियमों, प्रक्रियाओं तथा प्रशिक्षण व्यवस्था में आवश्यक सुधार नहीं किए गए, तो यह असंतुलन भविष्य में प्रशासनिक दक्षता के लिए और भी बड़ी चुनौती बन सकता है। इसलिए आवश्यक है कि डिजिटल युग की आवश्यकताओं के अनुरूप कार्यालयी नियमों, कार्य-प्रणालियों तथा अभिलेख प्रबंधन प्रणाली का व्यापक पुनरीक्षण किया जाए, ताकि तकनीक और प्रशासन के बीच प्रभावी सामंजस्य स्थापित हो सके।

साथ ही, कर्मचारियों का भी यह दायित्व है कि वे बदलते समय के साथ स्वयं को निरंतर अद्यतन करें, नई तकनीकों को सीखने के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाएँ तथा अपनी कार्यकुशलता में निरंतर वृद्धि करें। जो कर्मचारी समय के साथ स्वयं को विकसित करेंगे, वही भविष्य की प्रशासनिक व्यवस्था में अधिक प्रभावी, उपयोगी और प्रासंगिक बने रहेंगे।